विश्व फोटोग्राफी दिवस पर NBCS का बड़ा संदेश—AI से डरने के बजाय उसे ताकत बनाने की जरूरत; फोटोग्राफरों की आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक सुरक्षा पर भी उठे सवाल
काशी में जुटे सैकड़ों छायाकार, डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा—AI फोटोग्राफर को खत्म नहीं करेगा, लेकिन AI जानने वाला फोटोग्राफर आगे जरूर निकल सकता है
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क । वाराणसी।
एक दौर था जब कैमरा खरीदना ही फोटोग्राफी की दुनिया में प्रवेश की सबसे बड़ी सीढ़ी माना जाता था। फिर Digital Camera आया, Smartphone ने तस्वीर खींचना सबके हाथ में पहुंचा दिया और अब Artificial Intelligence यानी AI फोटो बनाने, सुधारने और Edit करने की क्षमता को एक नए स्तर पर ले जा रहा है। ऐसे समय में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि AI फोटोग्राफी को बदलेगा या नहीं—बड़ा सवाल यह है कि क्या Professional Photographer बदलती तकनीक के साथ खुद को बदलने के लिए तैयार है?

विश्व फोटोग्राफी दिवस पर वाराणसी के रामकटोरा स्थित श्री अन्नपूर्णा बैंक्वेट में आयोजित न्यू बनारस कैमरा सोसाइटी (NBCS) के कार्यक्रम में यही सवाल एक महत्वपूर्ण संदेश बनकर सामने आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं NBCS के संरक्षक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने फोटोग्राफरों से तकनीक से डरने के बजाय उसे अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया।
कैमरा नहीं, नजर बनाती है बड़ा Photographer
डॉ. तिवारी ने फोटोग्राफी को सिर्फ व्यवसाय नहीं बल्कि समाज की स्मृतियों और इतिहास को सुरक्षित रखने वाली कला बताया। उनका संदेश सीधे उस बदलती दुनिया पर निशाना था जहां आज कुछ सेकंड में AI किसी तस्वीर का background बदल सकता है, चेहरे की खामियां सुधार सकता है और कई मामलों में ऐसी image तैयार कर सकता है जो वास्तविक कैमरे से खींची हुई दिखाई देती है।
लेकिन यहीं Professional Photographer की असली परीक्षा शुरू होती है।
महंगा Camera, Lens या Drone किसी को अपने आप बड़ा Photographer नहीं बनाता। असली फर्क Observation, Timing, Composition, Storytelling और Moment को पहचानने की क्षमता से पड़ता है।

यही वजह है कि डॉ. तिवारी ने युवा छायाकारों से कहा कि किसी assignment को छोटा न समझें। सामान्य दिखाई देने वाला कोई क्षण भविष्य में ऐतिहासिक महत्व रख सकता है।
AI से खतरा कम, पीछे छूट जाने का खतरा ज्यादा
AI को लेकर Photography Industry में सबसे बड़ा डर यह है कि क्या मशीन Photographer की जगह ले लेगी?

डॉ. तिवारी ने इस बहस को एक अलग दिशा दी। उनका कहना था कि AI Photographer को खत्म नहीं करेगा, लेकिन AI का इस्तेमाल करने वाला Photographer उस Photographer से आगे निकल सकता है जो तकनीक को सीखना नहीं चाहता।
यही इस पूरे आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश बनकर सामने आया।
आज Photographer के सामने केवल कैमरे का ज्ञान पर्याप्त नहीं रह गया है। उसे Editing, AI Tools, Drone Photography, Cinematic Video, Social Media और Digital Marketing जैसी तकनीकों की जानकारी भी तेजी से हासिल करनी होगी।
अर्थात भविष्य का Photographer केवल Camera Operator नहीं, बल्कि Visual Content Creator होगा।
Smartphone ने Camera की जरूरत खत्म नहीं की, बदली है
हर व्यक्ति के हाथ में Smartphone Camera आने के बाद यह सवाल भी उठा था कि अब Professional Photographer की जरूरत क्यों होगी?
लेकिन शादी, समारोह, विज्ञापन, Documentary, Wildlife, Journalism और बड़े Events में Professional Photography की मांग बनी हुई है।
कारण साफ है—Smartphone तस्वीर बना सकता है, लेकिन हर तस्वीर के पीछे की कहानी, सही Moment और visual narrative को पहचानना अलग कौशल है।
यही अंतर आने वाले वर्षों में AI और Professional Photographer के बीच भी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
फोटोग्राफर दूसरों की यादें बचाते हैं, लेकिन उनकी अपनी सुरक्षा?
कार्यक्रम में फोटोग्राफरों की Welfare का सवाल भी महत्वपूर्ण रूप से सामने आया।
Photographer पूरे वर्ष दूसरों की शादियों, परिवारों, समारोहों और महत्वपूर्ण अवसरों को रिकॉर्ड करता है। लेकिन उसके अपने profession की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है—यह सवाल अभी भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में फोटोग्राफरों के लिए Insurance, Emergency Assistance और उनके परिवारों के हित में योजनाबद्ध पहल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
यह विषय केवल Photographer Community का मुद्दा नहीं है। यह उस पूरे अनौपचारिक Creative Workforce से जुड़ा सवाल है जिसकी आय अक्सर project और season पर निर्भर करती है।
हालांकि NBCS की भविष्य की योजनाओं के रूप में इन पहलों का उल्लेख किया गया, लेकिन इनके लिए ठोस समयसीमा, बजट और क्रियान्वयन व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई। इसलिए इन योजनाओं को फिलहाल भविष्य की संभावित पहल के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
काशी की तस्वीरों का Digital Archive क्यों जरूरी?
फोटोग्राफी सिर्फ वर्तमान को रिकॉर्ड नहीं करती। वर्षों बाद वही तस्वीर इतिहास का दस्तावेज बन सकती है।
काशी और पूर्वांचल जैसे सांस्कृतिक क्षेत्र में हजारों महत्वपूर्ण तस्वीरें अलग-अलग Photographers के निजी Archives में मौजूद हो सकती हैं। सवाल यह है कि इन तस्वीरों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित करने, Digitise करने और भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए कोई व्यापक Photographic Archive तैयार हो रहा है या नहीं।
विश्व फोटोग्राफी दिवस जैसे आयोजन इस दिशा में एक बड़ा अवसर बन सकते हैं।
यदि स्थानीय Photographer Community, संस्थाएं और प्रशासन मिलकर पुराने फोटो Archives को Digitise करने की पहल करें तो यह सिर्फ Photography Industry नहीं बल्कि काशी के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास के संरक्षण का महत्वपूर्ण काम होगा।
फोटो प्रदर्शनी में दिखी फोटोग्राफी की कई दुनिया
कार्यक्रम में आयोजित फोटो प्रदर्शनी में Wildlife, Landscape, Portrait, Street और Wedding Photography की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं।
यह प्रदर्शनी इस बात का संकेत भी थी कि Photography अब केवल शादी और समारोह तक सीमित पेशा नहीं रह गया है। इसके भीतर कई अलग-अलग Specialized Fields विकसित हो चुके हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ छायाकार बिनय रावल ने की। NBCS अध्यक्ष रंजन गौड़ ने सदस्यों का स्वागत किया और सचिव एवं वरिष्ठ छायाकार अजय पाण्डेय ने संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ छायाकार रत्नाकर अवस्थी को Lifetime Achievement Award
कार्यक्रम में वरिष्ठ छायाकार रत्नाकर अवस्थी को फोटोग्राफी के क्षेत्र में योगदान के लिए Lifetime Achievement Award से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा वैवाहिक छायाचित्र प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें श्रेष्ठ प्रतिभागियों को ₹1500, ₹1000 और ₹500 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई तथा अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत NBCS के संस्थापक स्व. रवि पाण्डेय के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर हुई। इस दौरान हर-हर महादेव के जयघोष से परिसर गूंज उठा।
‘दूसरों की यादें बचाते-बचाते अपनी तस्वीर मत भूलिए’
कार्यक्रम में डॉ. तिवारी का एक संदेश विशेष रूप से भावुक करने वाला रहा।
उन्होंने फोटोग्राफरों से कहा कि वे दूसरों के परिवारों, शादियों और खुशियों को कैमरे में कैद करते हैं, लेकिन अपने परिवार के साथ तस्वीर खिंचवाना भी न भूलें। उनका संदेश था कि इस बार कैमरा किसी दूसरे को देकर खुद भी उस Frame में आएं।
यह संदेश Photography के तकनीकी भविष्य से अलग उसकी मानवीय भूमिका को सामने लाता है।
KHABARI NEWS INVESTIGATION — 5 बड़े सवाल
1. AI के दौर में पूर्वांचल के Photographers को Training देने के लिए NBCS की ठोस योजना क्या है?
2. फोटोग्राफरों के Insurance और Emergency Assistance के लिए प्रस्तावित व्यवस्था कब और कैसे लागू होगी?
3. काशी और पूर्वांचल के पुराने Photographic Archives को सुरक्षित करने के लिए कोई Digital Archive Project क्यों नहीं शुरू किया जाता?
4. Smartphone और AI के बढ़ते दौर में Professional Photographers के लिए नए रोजगार और Business Models क्या हो सकते हैं?
5. क्या आने वाले समय में NBCS Photographer Community के लिए सिर्फ संगठन नहीं, बल्कि Training + Technology + Welfare + Business Support Platform के रूप में विकसित हो सकेगा?
KHABARI NEWS EXCLUSIVE
विश्व फोटोग्राफी दिवस का यह आयोजन सिर्फ Camera और Photography का उत्सव नहीं रहा। इसके केंद्र में एक बड़ा परिवर्तन साफ दिखाई दिया—Photography की अगली लड़ाई Camera की कीमत से नहीं, Technology को समझने और सही Moment को पहचानने की क्षमता से तय होगी।
AI तस्वीर बना सकता है, उसे बदल सकता है और उसे बेहतर दिखा सकता है। लेकिन किस तस्वीर को खींचना है, कब खींचना है और उस तस्वीर में कहानी क्या है—यह फैसला अभी भी इंसानी नजर की सबसे बड़ी ताकत है।
और शायद आने वाले दौर के Photographer के लिए यही सबसे बड़ा संदेश है—
“AI से डरिए मत… उसे सीखिए। क्योंकि भविष्य Camera रखने वालों का नहीं, Camera के साथ Technology और नजर दोनों रखने वालों का होगा।”
— KHABARI NEWS INVESTIGATION




















