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आईटीपी योजना से उद्योगों को मिलेगा कुशल मानव संसाधन, रोजगार और कौशल विकास के बीच बनेगा मजबूत सेतु

लखनऊ में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) और लघु उद्योग भारती के बीच आयोजित संयुक्त बैठक में औद्योगिक प्रशिक्षण भागीदारी (आईटीपी) योजना को लेकर व्यापक चर्चा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को योजना की कार्यप्रणाली, लाभ और प्रावधानों की जानकारी देना था, ताकि कौशल विकास और रोजगार के बीच एक मजबूत और प्रभावी सेतु स्थापित किया जा सके।

UPSDM और लघु उद्योग भारती की संयुक्त बैठक में आईटीपी योजना पर जोर, उद्योगों को स्थानीय स्तर पर मिलेगा प्रशिक्षित कार्यबल

बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और योजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि आईटीपी योजना उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार-योग्य बनाकर सीधे उद्योगों से जोड़ना है।

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उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उद्योग अपनी जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर सकते हैं। इससे न केवल युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि उद्योगों को भी प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। पुलकित खरे ने कहा कि इससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा और उद्योगों की उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।

आईटीपी योजना की एक विशेषता यह है कि यह स्थानीय स्तर पर युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें उसी क्षेत्र के उद्योगों से जोड़ती है। इससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ जाती है, वहीं उद्योगों को भी बाहर से श्रमिक लाने की आवश्यकता कम हो जाती है। यह व्यवस्था भर्ती प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाती है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है।

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बैठक में उपस्थित रविंद्र सिंह और केशव माथुर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार और उद्योगों के बीच इस प्रकार का समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आईटीपी योजना से न केवल उद्योगों को लाभ मिलेगा, बल्कि युवाओं को भी स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में उद्योगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता है। ऐसे में यह योजना इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर उभर सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता से उद्योगों को तेजी से काम करने में सुविधा होगी और उत्पादन लागत भी कम होगी।

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बैठक में यह भी बताया गया कि आईटीपी योजना के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र को विशेष रूप से सशक्त किया जाएगा। यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में इस योजना का सफल क्रियान्वयन प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देगा।

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार एवं सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह सहित कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस योजना को सफल बनाने के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ाएगी। यह पहल प्रदेश में कौशल विकास और रोजगार के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि आईटीपी योजना उत्तर प्रदेश में उद्योग और युवाओं के बीच एक मजबूत कड़ी साबित हो सकती है। इससे जहां एक ओर युवाओं को अपने कौशल के अनुरूप रोजगार मिलेगा, वहीं उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध होगा। यह पहल प्रदेश के समग्र विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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