चंदौली जनपद के शहाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम केराडीह से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महेश चौहान (पुत्र सुमेर), एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखते थे। सांप के काटने के बाद उन्होंने जिंदगी की जंग तो लड़ी, लेकिन अंततः वह इस लड़ाई को हार गए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या महेश की मौत सांप के जहर से हुई या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही इसकी वजह बनी?
घटना की शुरुआत: 18 अप्रैल की शाम

18 अप्रैल की शाम करीब 7:30 बजे महेश चौहान को सिवान में एक जहरीले सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने बिना देर किए उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया।
हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें अगले दिन बेहतर इलाज के लिए वाराणसी स्थित Banaras Hindu University (BHU) रेफर कर दिया।
BHU में राहत… लेकिन अधूरी
19 अप्रैल को महेश चौहान को BHU में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और कुछ समय बाद उन्हें “खतरे से बाहर” बताया। यह खबर सुनकर परिवार को बड़ी राहत मिली।
20 अप्रैल को डॉक्टरों ने महेश को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों को लगा कि अब स्थिति सामान्य है और खतरा टल चुका है।

लेकिन यहीं से कहानी ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया।
घर पहुंचते ही बिगड़ी हालत
BHU से घर लौटने के कुछ ही समय बाद महेश चौहान की हालत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें कमजोरी, बेचैनी और अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने लगे।

परिजन घबरा गए और दोबारा इलाज की कोशिश करने लगे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। धीरे-धीरे उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें बचाया नहीं जा सका और उनकी मौत हो गई।
मौत या मेडिकल लापरवाही?
महेश चौहान की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या उन्हें समय से और पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम (Anti-venom) दिया गया था?
- क्या उन्हें जल्दबाजी में डिस्चार्ज कर दिया गया?
- क्या डिस्चार्ज के समय सही मेडिकल सलाह और निगरानी के निर्देश दिए गए थे?
- क्या पोस्ट-ट्रीटमेंट फॉलोअप की व्यवस्था की गई थी?
परिजनों का आरोप है कि अगर सही और लगातार इलाज मिलता, तो महेश की जान बच सकती थी।
ग्रामीणों के सवाल
गांव के लोगों का कहना है कि जब देश के एक प्रतिष्ठित अस्पताल Banaras Hindu University (BHU) ने यह कहकर महेश चौहान को डिस्चार्ज किया कि वह खतरे से बाहर हैं, तो फिर घर पहुंचने के बाद उनकी हालत अचानक कैसे बिगड़ गई?
ग्रामीणों के अनुसार, यह समझ से परे है कि यदि जहर का असर खत्म हो चुका था तो फिर मौत कैसे हुई। हालांकि, इस पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ पाएगी कि मौत वास्तव में सांप के जहर से हुई या किसी अन्य कारण से।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी किस तरह लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। सही समय पर इलाज, स्पष्ट गाइडलाइन और फॉलोअप की कमी कई बार ऐसी घटनाओं को जन्म देती है।
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प्रशासन से जांच की मांग
महेश चौहान की मौत के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। सभी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।



















