डीडीयू नगर, चंदौली। जनपद के सकलडीहा विकासखंड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कागजों में जहां 213 सफाईकर्मी तैनात दिखाए जा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। गांवों की गलियां कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं, नालियां जाम हैं और बदबू से लोगों का जीना दूभर हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सफाईकर्मी काम क्यों नहीं कर रहे, जबकि उन्हें हर महीने मोटा वेतन मिल रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकतर सफाईकर्मी बिना झाड़ू उठाए ही लगभग 48 हजार रुपये मासिक वेतन ले रहे हैं। इतना ही नहीं, कई कर्मचारी लग्जरी वाहनों में घूमते देखे जाते हैं, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यह पूरा मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है।

समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी लापरवाही बताते हुए गरीबों के पैसे की बंदरबांट करार दिया है। उनका कहना है कि जब सरकार सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो उसका लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
सकलडीहा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले 104 ग्राम पंचायतों और करीब 180 राजस्व गांवों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हैं और नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी महीने में सिर्फ एक-दो बार ही गांव आते हैं, वह भी तब जब किसी निरीक्षण की सूचना होती है।
एक स्थानीय किसान ने बताया कि “सफाईकर्मी केवल दिखावे के लिए आते हैं, बाकी समय वे ठेकेदारी या अन्य निजी कामों में व्यस्त रहते हैं।” इस तरह के आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ सफाईकर्मी सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में काम कर रहे हैं। यही वजह है कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि ये कर्मचारी अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग में भी प्रभाव डालते हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन भी यहां केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। गांवों में न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही कचरा प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई देती है।
तारापुर और चांदपुर जैसे गांवों की स्थिति और भी गंभीर है। यहां तैनात सफाईकर्मी महीनों तक गांव में दिखाई नहीं देते, जिससे गंदगी का अंबार लग गया है। इससे महामारी फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी उपस्थिति दर्ज की जाती है और कागजों में सफाई कार्य दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। कई लोग इसे मनरेगा घोटाले जैसी स्थिति बता रहे हैं।
विधायक प्रभुनारायण यादव द्वारा मामला उठाने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। टिमिलपुरा गांव के सुरेंद्र चौहान को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है, जबकि कुछ पंचायत सहायकों को बर्खास्त भी किया गया है। एडीओ पंचायत बजरंगी पांडेय ने साफ कहा है कि यदि किसी के खिलाफ लिखित शिकायत मिलती है तो उसका वेतन रोका जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला सकलडीहा में एक बड़ी मुहिम का रूप ले चुका है। ग्रामीण साफ-सुथरे गांव की मांग कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह देखना होगा कि क्या वाकई में कोई ठोस सुधार होगा या फिर यह मामला भी समय के साथ दब जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव चाहिए, क्योंकि गंदगी के बीच जीवन जीना उनके लिए दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।


















