मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में उपेक्षा का लगाया आरोप
बीडीओ बोले— पहले कभी कार्यक्रम में नहीं आए थे सांसद, इसलिए नहीं जोड़ा गया नाम; सांसद ने जवाब में कहा— जनप्रतिनिधि का सम्मान उपस्थिति का मोहताज नहीं
चकिया‚चन्दौली। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शहाबगंज विकास खंड परिसर में आयोजित सरकारी कार्यक्रम के बैनर से क्षेत्रीय सांसद छोटेलाल खरवार का नाम और फोटो गायब होने का मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है। सांसद ने इसे अपनी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि के सम्मान की उपेक्षा बताते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिकायत के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाएंगे।
सांसद के इस बयान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सम्मान को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

“यह सिर्फ मेरा नहीं, लोकतंत्र का अपमान है”
सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि सरकारी कार्यक्रम किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नहीं बल्कि सरकार और जनता का होता है। ऐसे आयोजनों में सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को समान सम्मान मिलना चाहिए। यदि किसी सांसद का नाम और फोटो जानबूझकर हटाया जाता है तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें संसद में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए चुना है और यदि उनके क्षेत्र के सम्मान के साथ खिलवाड़ होगा तो वह चुप नहीं बैठेंगे।
“मैं पहले संबंधित अधिकारियों से शिकायत करूंगा। यदि शिकायत के बाद भी न्याय नहीं मिला तो इस पूरे मामले को संसद में उठाऊंगा। जनप्रतिनिधियों के सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।”
— छोटेलाल खरवार, सांसद
आखिर क्या है पूरा विवाद ?
शहाबगंज विकास खंड परिसर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम के लिए लगाए गए आधिकारिक बैनर में विभिन्न जनप्रतिनिधियों के नाम और चित्र प्रकाशित किए गए थे। सांसद छोटेलाल खरवार का आरोप है कि क्षेत्र के निर्वाचित सांसद होने के बावजूद उनका नाम और फोटो बैनर से गायब रखा गया। इसे उन्होंने गंभीर लापरवाही बताते हुए पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सांसद का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में इस तरह की चूक जनता के बीच गलत संदेश देती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।

बीडीओ ने दी सफाई, बताई वजह
उधर, पूरे विवाद पर शहाबगंज के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दिनेश सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि इससे पहले आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में सांसद छोटेलाल खरवार कभी शामिल नहीं हुए थे। इसी वजह से तैयार किए गए बैनर में उनका नाम और फोटो शामिल नहीं किया गया।
बीडीओ ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि की जानबूझकर उपेक्षा करने का कोई उद्देश्य नहीं था। उनके अनुसार कार्यक्रम की तैयारियां पूर्व निर्धारित प्रारूप के अनुसार की गई थीं और इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी।

बीडीओ की दलील से असहमत सांसद
हालांकि सांसद छोटेलाल खरवार प्रशासन की इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि की पूर्व उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर सरकारी कार्यक्रम के बैनर से उसका नाम और फोटो हटाना उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सांसद पूरे संसदीय क्षेत्र का निर्वाचित प्रतिनिधि होता है और सरकारी आयोजनों में उसका सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
जिले में तेज हुई राजनीतिक चर्चा
सांसद के सख्त तेवर के बाद पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि यदि मामला आगे बढ़ता है और संसद तक पहुंचता है तो यह केवल एक बैनर विवाद नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करेगा।
अब प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजर
फिलहाल सांसद ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। यदि शिकायत के बाद भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती तो वह संसद में इस मुद्दे को उठाकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद का समाधान किस प्रकार करता है और क्या इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाती है।
सांसद का बड़ा बयान
“यह केवल सांसद छोटेलाल खरवार का मामला नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि के सम्मान का प्रश्न है। यदि प्रशासन न्याय नहीं देगा तो संसद में इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाऊंगा। लोकतंत्र में किसी भी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती।”
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