“सरकारी कार्य में बाधा, अभद्रता और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश!” — तहसीलदार चकिया ने खोला मोर्चा
उतरौत गांव में चकरोड विवाद ने पकड़ा तूल, तहसीलदार ने पुलिस को भेजा सख्त पत्र
ग्राम प्रधान कंचन मौर्या, उनके पति महेन्द्र कुमार सिंह, संतोष पाठक समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति
तहसीलदार बोले— सरकारी जमीन और चकरोड पर अवैध हस्तक्षेप किसी कीमत पर नहीं होगा बर्दाश्त
राजस्व विभाग द्वारा लगाए गए सीमांकन के खूंटे और पत्थर उखाड़ने का गंभीर आरोप
खबरी न्यूज | विशेष रिपोर्ट
संपादक: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)।
चकिया ‚चंदौली । जिले की चकिया तहसील में उस समय सियासी और प्रशासनिक गलियारों में जबरदस्त हलचल मच गई जब तहसीलदार चकिया देवेन्द्र कुमार ने एक समाजवादी पार्टी नेता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस को प्रार्थना पत्र भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

चकिया तहसील क्षेत्र के ग्राम उतरौत में चकरोड विवाद अब प्रशासन और स्थानीय राजनीति के बीच बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। मामले को गंभीर मानते हुए तहसीलदार चकिया देवेन्द्र कुमार ने थाना प्रभारी को पत्र भेजकर ग्राम प्रधान, उनके पति तथा अन्य नामजद लोगों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की संस्तुति की है।
तहसीलदार द्वारा भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम उतरौत स्थित गाटा संख्या 37/422 के चकरोड का सीमांकन राजस्व विभाग की टीम द्वारा पुलिस बल की मौजूदगी में कराया गया था। सीमांकन के बाद लगाए गए सरकारी चिन्ह, खूंटे और पत्थरों को कथित रूप से उखाड़ दिया गया, जिससे न केवल सरकारी कार्य प्रभावित हुआ बल्कि क्षेत्र में तनाव और विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई।

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प्रशासनिक सख्ती का चेहरा बने तहसीलदार देवेन्द्र कुमार
चकिया तहसील में पिछले कुछ समय से राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण, अवैध कब्जों पर कार्रवाई और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर तहसीलदार देवेन्द्र कुमार लगातार सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार जिस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है, उसमें तहसीलदार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कार्यालयों में दबाव, धमकी या राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक हलकों में इस कदम को एक मजबूत और साहसिक निर्णय माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सरकारी कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आखिर क्या है पूरा मामला?
सपा नेता का नाम आने से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
मामले में जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है, उनमें ग्राम प्रधान कंचन मौर्या, उनके पति महेन्द्र कुमार सिंह तथा संतोष पाठक, केवड़ा देवी, बद्री विशाल पाठक, गजेन्द्र पाठक और विकास पाठक के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार महेन्द्र कुमार सिंह को स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि प्रशासनिक कार्रवाई की इस संस्तुति के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।
मामले की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई गई।
पुलिस जांच के बाद होगी अगली कार्रवाई
तहसीलदार द्वारा दिए गए आवेदन के बाद अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। पुलिस विभाग मामले की जांच कर रहा है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि सरकारी कार्य में बाधा, अभद्रता और शासकीय कर्मचारियों को प्रभावित करने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही तहसीलदार द्वारा कार्रवाई की खबर सामने आई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
एक वर्ग तहसीलदार देवेन्द्र कुमार के कदम को प्रशासनिक गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लोग खुलकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
तहसीलदार देवेन्द्र कुमार का साफ संदेश
चकिया तहसील में हुए इस घटनाक्रम के बाद तहसीलदार देवेन्द्र कुमार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट माना जा रहा है—
“सरकारी कार्य में व्यवधान और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
उनके इस रुख को प्रशासनिक मजबूती और कानून के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
खबरी न्यूज की नजर
चकिया तहसील का यह मामला अब केवल एक शिकायत भर नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन और राजनीति के बीच बढ़ते टकराव की चर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
फिलहाल पूरे जनपद की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तहसीलदार देवेन्द्र कुमार की शिकायत पर पुलिस क्या कदम उठाती है और इस मामले का अंतिम परिणाम क्या निकलता है।
“चकिया तहसील में सियासी भूचाल! तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने सपा नेता के खिलाफ FIR की मांग कर मचाई सनसनी”
“सरकारी कार्य में बाधा और अभद्रता के आरोप, तहसीलदार के एक्शन से प्रशासनिक गलियारों में हलचल”
“देवेन्द्र कुमार का कड़ा संदेश— कानून से ऊपर कोई नहीं, सरकारी काम में हस्तक्षेप नहीं होगा बर्दाश्त”
“अब पुलिस की जांच पर टिकी नजरें, चकिया की राजनीति में बढ़ी गर्मी”



















