Pachvania Bridge Chandauli: चंदौली जनपद के ग्राम पचवनिया में बन रहा पुल अब विकास के बजाय विवाद का केंद्र बन गया है। पुल के बीयर (छल्का) की कम ऊंचाई को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह तकनीकी खामी भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।
किसानों की चिंता: 500 एकड़ खेती पर संकट
वीरपुर, केराडीह, बड़गांव और पचवनिया मौजा के किसानों ने आरोप लगाया है कि यदि पुल के बीयर की ऊंचाई कम से कम 1 फीट नहीं बढ़ाई गई, तो करीब 500 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई बाधित हो जाएगी। इससे फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

तकनीकी खामी: पानी के प्रवाह में बाधा
किसानों के अनुसार, बीयर की ऊंचाई कम होने से नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाएगा। पानी का प्रवाह रुकने से सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है, जिससे आने वाले सीजन की खेती भी प्रभावित होगी।
जनप्रतिनिधि से गुहार: शिव तपस्या पासवान से मुलाकात
किसानों ने अपनी समस्या को लेकर पूर्व विधायक एवं Power Grid Corporation of India के डायरेक्टर शिव तपस्या पासवान से मुलाकात की और मौके की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रशासनिक कार्रवाई: XEN को दिए गए निर्देश
शिव तपस्या पासवान ने मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित एक्सईएन (XEN) से संपर्क किया और समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विभाग का आश्वासन: जल्द होगा समाधान
एक्सईएन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी किसान की सिंचाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही जूनियर इंजीनियर (JE) और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर तकनीकी समाधान निकाला जाएगा।

समाजसेवियों की भूमिका: किसानों की आवाज बनी ताकत
इस मुद्दे को उठाने में समाजसेवी वृजेश चौहान, रामआश्रय चौहान और कन्हैया चौहान की अहम भूमिका रही। इन लोगों ने लगातार किसानों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाया।
किसानों की एकजुटता: विरोध प्रदर्शन में बड़ी भागीदारी
गांव में हुई बैठक और विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। शैलेन्द्र चौहान, अनिल चौहान, क्रांति चौहान, लवकुश चौहान, बबलू चौहान, जय हिंद चौहान, केदारनाथ चौहान, ऋषि चौहान, पारसनाथ चौहान, इन्दर चौहान, विनोद चौहान, संजय चौहान और कृष्णानंद चौहान सहित कई किसान एकजुट नजर आए।

चेतावनी: समाधान न हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक है, जब वह किसानों के हित में हो।
आगे क्या?: प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर प्रशासन और तकनीकी टीम की अगली कार्रवाई पर है। यदि जल्द समाधान किया गया, तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।




















