Khabari News चंदौली। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा संरक्षण, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालय पचवनिया के प्रांगण में एक विशेष किसान जागरूकता शिविर एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन “सघन खेत बचाओ अभियान, सशक्त मिट्टी-सशक्त किसान-समृद्ध भारत अभियान” के अंतर्गत किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया और अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत किसानों के स्वागत के साथ हुई। शिविर में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने किसानों को खेती में आ रही नई चुनौतियों तथा उनके समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों से परिचित कराना था, जिनके माध्यम से वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।


जैविक खेती को बढ़ावा देने पर दिया गया जोर
संगोष्ठी में वक्ताओं ने किसानों को जैविक खेती के महत्व से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे उत्पादित फसलें स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहतर होती हैं।
किसानों को गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक उर्वरकों के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि जैविक खेती अपनाकर किसान अपनी उत्पादन लागत को कम कर सकते हैं और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
मृदा परीक्षण कराने की दी सलाह
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक निशिकांत मौर्य ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसान बिना मिट्टी की जांच कराए ही खाद और उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, जिससे कई बार फसलों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे नियमित रूप से अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराएं और रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी बल्कि फसलों की पैदावार में भी वृद्धि होगी।

फसलों में रोग और रोकथाम पर हुई चर्चा
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभय दीपक गौतम ने किसानों को खरीफ और अन्य मौसमी फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों और कीटों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय रहते रोगों की पहचान और उचित प्रबंधन से फसलों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को संतुलित पोषण, उचित सिंचाई व्यवस्था तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कीटनाशकों के प्रयोग की जानकारी दी। साथ ही मौसम के अनुसार खेती की रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

वित्तीय साक्षरता और बीमा योजनाओं की दी जानकारी
शिविर के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी और बैंकिंग योजनाओं की भी जानकारी दी गई। किसानों को किसान सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना तथा अन्य लाभकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि बीमा योजनाएं किसानों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती हैं। ऐसे में अधिक से अधिक किसानों को इन योजनाओं से जुड़ना चाहिए ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके।
डिजिटल फ्रॉड से बचाव के लिए किया गया जागरूक
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता से जुड़ा रहा। वर्तमान समय में बढ़ रहे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई।
वक्ताओं ने किसानों को बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें। इसके अलावा संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल और लालच देने वाले संदेशों से बचने की भी सलाह दी गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर डिजिटल फ्रॉड जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है। किसानों को साइबर हेल्पलाइन और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
किसानों की समस्याओं का मौके पर हुआ समाधान
शिविर के दौरान किसानों ने खेती, सिंचाई, बीज, उर्वरक, रोग नियंत्रण तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित कई प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर देते हुए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
कई किसानों ने बताया कि उन्हें पहली बार एक ही मंच पर खेती, बीमा, वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी इतनी व्यापक जानकारी प्राप्त हुई है। किसानों ने ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित किए जाने की मांग भी की।
प्रमुख लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक निशिकांत मौर्य, सहायक विकास अधिकारी कृषि अजीत मौर्य, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभय दीपक गौतम, किसान मित्र टीम के आलोक दीप, अतुल बुआ और सारिका मिश्रा सहित क्षेत्र के अनेक किसान उपस्थित रहे।
किसानों के लिए उपयोगी साबित हुआ शिविर
पचवनिया में आयोजित यह किसान जागरूकता शिविर किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती, मृदा संरक्षण, बीमा योजनाओं तथा डिजिटल सुरक्षा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं तो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
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