स्टॉकिस्टों ने हाथ खड़े किए, छोटे दुकानदारों की दुकानें खाली; नवरात्र में बढ़ी मांग के बीच उपभोक्ताओं की जेब पर मार
जब सरकार की नजर स्टॉक पर है, तो बाजार से चीनी गायब कैसे? जिम्मेदार अधिकारी कब लेंगे सुधि?

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया, चंदौली। बाजार में जरूरी सामान की किल्लत हो और त्योहार के बीच उसकी कीमतें आसमान छूने लगें, तो सबसे ज्यादा परेशानी आम आदमी को उठानी पड़ती है। चकिया में इन दिनों चीनी की उपलब्धता को लेकर ऐसी ही स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय किराना बाजार में चीनी की कमी, स्टॉकिस्टों की ओर से आपूर्ति नहीं किए जाने और कीमतों में अचानक उछाल की शिकायतों ने छोटे दुकानदारों के साथ आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारी के मुताबिक, महज तीन दिनों में चीनी के दाम 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। यदि यह स्थिति सही है, तो बाजार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
स्टॉकिस्टों ने हाथ खड़े किए, दुकानदार कहां से लाएं चीनी?
चकिया के प्रसिद्ध किराना व्यापारी अजय गुप्ता ने बताया कि चीनी के स्टॉकिस्ट फिलहाल चीनी देने से हाथ खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहद कम हो गई है। छोटे दुकानदारों के पास भी स्टॉक खत्म होने की स्थिति है। जिन दुकानदारों के पास थोड़ी-बहुत चीनी बची हुई है, वहां अधिक कीमत पर बिक्री किए जाने की बात सामने आ रही है।

व्यापारी के अनुसार, तीन दिनों के भीतर चीनी के भाव में 20 रुपये प्रति किलो तक का अंतर देखने को मिला है। हालांकि, इस मूल्य वृद्धि की आधिकारिक पुष्टि और बाजार के अलग-अलग विक्रेताओं से दरों का सत्यापन होना अभी बाकी है।
नवरात्र में बढ़ी मांग, उपभोक्ताओं की मुश्किलें दोगुनी
नवरात्र का त्योहार होने के कारण बाजार में चीनी की मांग बढ़ने की बात कही जा रही है। पूजा-पाठ, प्रसाद, मिठाइयों और घरों में बनने वाले पकवानों के लिए चीनी की जरूरत रहती है। ऐसे समय में यदि बाजार में आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ता है।
एक तरफ त्योहार की तैयारियां हैं, दूसरी तरफ जरूरी खाद्य सामग्री की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर छोटे दुकानदार ग्राहकों को चीनी उपलब्ध कराएं तो कहां से? यदि थोक बाजार से ही आपूर्ति नहीं हो रही, तो खुदरा दुकानदारों को दोषी ठहराने से पहले आपूर्ति व्यवस्था की पड़ताल जरूरी है।
जब ज्यादा स्टॉक रखने पर रोक की चर्चा, तो बाजार में चीनी का संकट क्यों?
चीनी की उपलब्धता को लेकर सबसे बड़ा सवाल सरकारी निगरानी व्यवस्था पर है। आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकार आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक और बाजार में उनकी उपलब्धता पर नजर रखने की बात करती है, तो फिर स्थानीय बाजार में चीनी की कमी की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

यदि स्टॉकिस्टों के पास पर्याप्त चीनी उपलब्ध है, लेकिन वे दुकानदारों को आपूर्ति नहीं कर रहे, तो इसकी वजह क्या है? क्या थोक बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्या कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बिक्री रोकी जा रही है, या फिर मांग और उपलब्धता के बीच वास्तविक अंतर पैदा हो गया है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
आपूर्ति की जांच हो, कालाबाजारी की शिकायतों पर कार्रवाई करे प्रशासन
चीनी की कथित किल्लत के बीच जिला प्रशासन और संबंधित आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। अधिकारियों को चकिया के थोक विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, उपलब्ध मात्रा तथा आपूर्ति की स्थिति की जांच करनी चाहिए। साथ ही, बाजार में चीनी की वास्तविक कीमत और दुकानदारों द्वारा की जा रही बिक्री दरों का भी सत्यापन आवश्यक है।

यदि जांच में जमाखोरी, कृत्रिम किल्लत पैदा करने या अनुचित तरीके से कीमत बढ़ाने के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आपूर्ति में वास्तविक कमी है, तो बाजार में पर्याप्त चीनी पहुंचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
आम आदमी का सवाल—त्योहार में राहत कौन देगा?
चकिया में चीनी की कमी और कीमतों में कथित उछाल का मामला केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है। यह सीधे आम उपभोक्ताओं की रसोई और त्योहार की तैयारियों से जुड़ा है। तीन दिनों में 20 रुपये प्रति किलो तक कीमत बढ़ने का दावा सही साबित होता है, तो यह मामूली बदलाव नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस शिकायत को गंभीरता से लेते हैं या बाजार की यह परेशानी यूं ही बनी रहती है। आखिर सवाल सीधा है—जब चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु बाजार में उपलब्ध नहीं होगी, तो आम आदमी अपनी जरूरत कैसे पूरी करेगा? प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल स्थिति स्पष्ट करे, आपूर्ति सुनिश्चित कराए और यदि कालाबाजारी के आरोप सही पाए जाएं, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे।
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क, चकिया–चंदौली
नोट: कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि और चीनी की अनुपलब्धता संबंधी विवरण स्थानीय व्यापारी के बयान पर आधारित हैं। आधिकारिक पुष्टि, स्वतंत्र बाजार सर्वेक्षण और संबंधित विभाग का पक्ष मिलने पर खबर को और पुष्ट किया जा सकता है।



















