1100 पौधों के साथ हरियाली का महाअभियान, विद्यार्थियों ने लिया वृक्ष संरक्षण का संकल्प, पर्यावरण बचाने का दिया गया संदेश
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क | चकिया, चंदौली।
प्रकृति को बचाने और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण देने के उद्देश्य से चकिया क्षेत्र के उसरी स्थित पंडित बच्चन जी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में उत्साह, उमंग और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ लगभग 1100 पौधों का रोपण किया गया। यह आयोजन केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देने वाला प्रेरणादायी अभियान बन गया।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ के साथ जुड़ा नया संकल्प—’एक पेड़ गुरु के नाम’
देशभर में चल रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को नई दिशा देते हुए कार्यक्रम में “एक पेड़ गुरु के नाम” अभियान का भी शुभारंभ किया गया। मीडिया ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सचिव के.सी. श्रीवास्तव एडवोकेट ने इस अभिनव पहल की शुरुआत करते हुए कहा कि जिस प्रकार माँ जीवन देती है, उसी प्रकार गुरु जीवन को दिशा देता है। ऐसे में गुरु के सम्मान में एक पौधा लगाना भारतीय संस्कृति, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम है।
उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अन्य लोगों को वृक्षों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन की शपथ दिलाई तथा कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है।

मुख्य अतिथि डॉ. परशुराम सिंह ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. परशुराम सिंह ने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते वन क्षेत्र जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का सबसे प्रभावी समाधान अधिक से अधिक वृक्षारोपण और उनका संरक्षण है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का नियमित अभियान बनाएं।
1100 पौधों से महका महाविद्यालय परिसर
महाविद्यालय परिसर में फलदार, छायादार एवं औषधीय प्रजातियों सहित लगभग 1100 पौधों का रोपण किया गया। वृक्षारोपण के दौरान छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रत्येक विद्यार्थी ने स्वयं पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। पूरे परिसर में “हरियाली ही खुशहाली” और “पेड़ बचाओ–जीवन बचाओ” जैसे संदेश गूंजते रहे।

प्रबंधन और शिक्षकों ने निभाई अग्रणी भूमिका
महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. अभिषेक कुमार पाण्डेय, प्राचार्य डॉ. शैलेश दूबे तथा समस्त शिक्षक एवं कर्मचारियों ने स्वयं पौधारोपण कर विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराना भी शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण दायित्व है।
‘वृक्ष हैं जीवन का आधार’
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि वर्षा, जल संरक्षण, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के सबसे बड़े आधार हैं। यदि आज वृक्षों की रक्षा नहीं की गई तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना चाहिए।

छात्रों ने ली संरक्षण की सामूहिक शपथ
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से वृक्षों की सुरक्षा एवं संरक्षण की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे केवल पौधे ही नहीं लगाएंगे, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करेंगे और समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।
युवाओं को मिला सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना, उन्हें सामाजिक दायित्वों से जोड़ना तथा हरित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। ऐसे अभियान विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
हर पौधा बनेगा आने वाले कल की पहचान
कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाले वर्षों में स्वच्छ हवा, शीतल छाया और बेहतर पर्यावरण का आधार बनेगा। “एक पेड़ माँ के नाम” और “एक पेड़ गुरु के नाम” जैसे अभियान केवल प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सम्मान और प्रकृति संरक्षण की साझा विरासत हैं। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस संकल्प को अपने जीवन में उतार ले, तो हरियाली से भरपूर, प्रदूषणमुक्त और स्वस्थ भारत का सपना निश्चित रूप से साकार हो सकता है।
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क का भी यही संदेश है—“पेड़ लगाइए, पेड़ बचाइए… क्योंकि आने वाली पीढ़ियां हमारी विरासत नहीं, हमारी जिम्मेदारी हैं।”
























