सुबह दुकान खुलने से पहले और शाम को समय खत्म होने के बाद शराब मिलने का आरोप, बिहार जाने वालों को ज्यादा शराब देने की भी चर्चा
कैलाशपुरी से रेलवे चौकी इलाके तक चर्चाएं तेज, ₹20 हजार पुलिस और ₹5 हजार आबकारी के नाम पर कथित मासिक भुगतान के दावे—जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल
सरदार महेन्द्र सिंह की रिर्पोट
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क। डीडीयू नगर, चंदौली |

मुगलसराय में शराब की दुकानों को लेकर इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या यहां शराब बिक्री के लिए सरकारी समय मायने रखता है या नहीं?
स्थानीय स्तर पर कुछ दुकानों को लेकर आरोप है कि सुबह निर्धारित समय से पहले ही शराब मिल जाती है और शाम को बिक्री का समय खत्म होने के बाद भी ग्राहकों को शराब उपलब्ध कराई जाती है। यही नहीं, बिहार की ओर जाने वाले कुछ लोगों को निर्धारित मात्रा से ज्यादा शराब दिए जाने की भी चर्चा है।
अगर यह सब सिर्फ चर्चा है तो जांच के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन अगर आरोप सही निकलते हैं तो मामला केवल दुकान संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा—निगरानी करने वाले सिस्टम से भी सवाल पूछे जाएंगे।
BIG BREAKING: ‘टाइम’ खत्म, फिर भी बिक्री?
स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की आवाजाही शुरू हो जाती है। आरोप है कि निर्धारित समय से पहले शराब उपलब्ध हो जाती है।

शाम को भी यही सवाल उठ रहा है—जब बिक्री का समय समाप्त हो जाता है, तब शराब कैसे मिलती है?
इसका सबसे सीधा जवाब किसी बयान से नहीं, बल्कि CCTV फुटेज और बिक्री रिकॉर्ड से मिलेगा।

कैलाशपुरी से रेलवे चौकी तक चर्चा
कैलाशपुरी सहित कुछ इलाकों की दुकानों को लेकर समय के बाहर बिक्री की चर्चाएं हैं।
रेलवे चौकी क्षेत्र से जुड़ी कुछ दुकानों को लेकर यह भी आरोप है कि बिहार जाने वाले ग्राहकों को सामान्य सीमा से अधिक शराब उपलब्ध कराई जाती है।
लेकिन यहां एक बात साफ है—चर्चा और प्रमाण में फर्क होता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए अब नजर उन रिकॉर्ड पर है जो इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।
₹20 हजार + ₹5 हजार का दावा, मामला यहीं से गंभीर
सबसे गंभीर आरोप कथित सुविधा शुल्क को लेकर हैं।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ दुकानदारों से कथित तौर पर हर महीने—
₹20,000 पुलिस के नाम पर
और
₹5,000 आबकारी विभाग के नाम पर
दिए जाने की चर्चा है।
लेकिन KHABARI NEWS इस रकम के भुगतान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
न कोई सत्यापित भुगतान दस्तावेज सामने आया है और न ही संबंधित विभागों ने इसकी पुष्टि की है।
इसलिए यह फिलहाल गंभीर जांच योग्य दावा है, अंतिम तथ्य नहीं।
अगर जांच में इसका कोई प्रमाण सामने आता है तो मामला बेहद गंभीर हो जाएगा और फिर सवाल सिर्फ शराब दुकानदारों से नहीं, बल्कि संबंधित व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ेगा।
थाना प्रभारी पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर मुगलसराय थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ सूत्र कथित संरक्षण और अवैध गतिविधियों के बदले रकम तय होने की चर्चा कर रहे हैं।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए किसी अधिकारी को दोषी घोषित करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अगर आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति साफ होगी और अगर सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
असल खेल CCTV खोलेगा या रिकॉर्ड?
मामले की सच्चाई जानने के लिए जांच में सबसे पहले ये चीजें देखी जानी चाहिए—
- दुकान का CCTV फुटेज
- स्टॉक रजिस्टर
- बिक्री रजिस्टर
- उपलब्ध डिजिटल बिक्री रिकॉर्ड
- आबकारी विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट
- संबंधित अवधि में पुलिस की शिकायत/कार्रवाई का रिकॉर्ड
अगर समय खत्म होने के बाद बिक्री हुई है तो उसका कोई न कोई रिकॉर्ड मिलने की संभावना होगी।
यही वजह है कि इस मामले में रिकॉर्ड आधारित जांच सबसे अहम है।
अब सबसे बड़ा सवाल
अगर शराब दुकानों पर समय से पहले और बाद में बिक्री नहीं होती तो स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लगातार क्यों है?
अगर होती है तो—
क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या निगरानी व्यवस्था में कहीं चूक हो रही है?
और अगर कथित ₹20 हजार और ₹5 हजार वाले आरोप गलत हैं तो—
इन आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच कब होगी?
KHABARI NEWS FACT CHECK
🟢 तथ्य: कुछ शराब दुकानों को लेकर समय से बाहर बिक्री के आरोप स्थानीय स्तर पर सामने आए हैं।
🟡 दावा: बिहार जाने वाले लोगों को निर्धारित मात्रा से अधिक शराब देने की चर्चा है।
🔴 अपुष्ट आरोप: पुलिस और आबकारी विभाग के नाम पर कथित मासिक भुगतान।
🔴 अपुष्ट आरोप: थाना प्रभारी के कथित संरक्षण का दावा।
इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
KHABARI NEWS का Exclusive Angle
यह सिर्फ शराब की दुकानों की कहानी नहीं है।
असल कहानी निगरानी व्यवस्था की है।
अगर कोई दुकानदार नियम तोड़कर समय के बाहर शराब बेचता है तो कार्रवाई उसकी होनी चाहिए। लेकिन यदि यह काम लगातार और खुले तौर पर हो रहा है, तो फिर यह सवाल भी उठेगा कि नियम लागू कराने वाली व्यवस्था आखिर कर क्या रही है?
🔎 पूरी पड़ताल पढ़िए—KHABARI NEWS





















