खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चंदौली।
चंदौली के कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षामित्रों के वर्षों के संघर्ष, उम्मीद और सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आया। प्रदेश सरकार द्वारा मानदेय में की गई वृद्धि के फैसले का यहां जोरदार स्वागत किया गया, जिससे पूरे जिले के 1424 शिक्षामित्रों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।


कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद साधना सिंह, पीडीडीयू नगर विधायक रमेश जायसवाल, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, चकिया विधायक कैलाश आचार्य और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया। मंच से सभी जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में शिक्षामित्रों की भूमिका को शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए सरकार के फैसले को दूरदर्शी कदम बताया।
सांसद साधना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मानदेय वृद्धि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों के सम्मान और उनके योगदान की स्वीकृति भी है। वहीं विधायक सुशील सिंह ने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे पहले की तरह समर्पण के साथ बच्चों के भविष्य को संवारने में अपनी भूमिका निभाते रहें।
कार्यक्रम के दौरान पांच शिक्षामित्रों को प्रतीकात्मक रूप से डमी चेक वितरित किए गए, जो इस निर्णय के क्रियान्वयन की शुरुआत का संकेत था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जल्द ही सभी पात्र शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इस घोषणा के बाद सभागार में मौजूद शिक्षामित्रों के चेहरे पर संतोष और उम्मीद दोनों साफ झलक रहे थे।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने ध्यानपूर्वक सुना। मुख्यमंत्री के संदेश ने शिक्षामित्रों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया और उन्हें शिक्षा क्षेत्र में और बेहतर योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार, शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष सहित कई विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षामित्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया गया और पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्साह का संतुलन देखने को मिला।

खबरी नजरिया:
शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि का यह निर्णय न केवल आर्थिक राहत देने वाला है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत जमीनी स्तर के कर्मियों के प्रति सरकार की सोच को भी दर्शाता है। हालांकि, लंबे समय से लंबित अन्य मांगों को लेकर शिक्षामित्रों की उम्मीदें अभी भी कायम हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षामित्रों की कार्यक्षमता पर कितना सकारात्मक असर डालता है।
फिलहाल, चंदौली में आयोजित यह समारोह एक स्पष्ट संदेश दे गया—शिक्षा के सिपाहियों का सम्मान अब केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि फैसलों में भी दिखने लगा है।





















