माँ के सम्मान में सजा भावनाओं का मंच”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
माँ… एक ऐसा शब्द जिसमें पूरा संसार समाया है। उसी ममता, त्याग और प्रेम को समर्पित रहा एसआरवीएस स्कूल सिकंदरपुर का भव्य मदर्स डे समारोह, जहां भावनाएं भी मुस्कुरा रही थीं और रिश्तों की गर्माहट भी मंच से छलक रही थी।
विद्यालय परिसर रविवार को उस समय तालियों, हंसी और भावुक पलों से गूंज उठा, जब माताओं और बच्चों ने एक साथ मंच साझा किया। कार्यक्रम में हर दृश्य ऐसा था मानो ममता खुद उत्सव बनकर उतर आई हो।
एसआरवीएस के समारोह की मुख्य अतिथि डा० गीता शुक्ला रहीं, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा और आत्मीयता प्रदान की। दीप प्रज्वलन और स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद बच्चों और माताओं ने मिलकर ऐसा समां बांधा कि पूरा विद्यालय परिवार भावुक और उत्साहित नजर आया।
कार्यक्रम में आयोजित रैम्प वॉक ने सबसे ज्यादा आकर्षण बटोरा। जब बच्चों ने अपनी माँ का हाथ थामकर मंच पर कदम रखा तो तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। “टच एंड आइडेंटिफाई” और “म्यूजिक विद ऑब्जेक्ट गेम” जैसी मनोरंजक गतिविधियों ने माहौल को पूरी तरह जीवंत बना दिया।
हर प्रतियोगिता में माँ-बेटे और माँ-बेटी के रिश्ते की खूबसूरत झलक दिखाई दी। कहीं ममता मुस्कुरा रही थी तो कहीं बच्चों का आत्मविश्वास माँ के चेहरे की खुशी बन गया।
एसआरवीएस के समारोह का सबसे खास पल रहा “मदर ऑफ द डे” का चयन। जैसे ही विजेता का नाम घोषित हुआ, पूरा परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। यह सम्मान सिर्फ एक उपाधि नहीं बल्कि हर माँ के संघर्ष, समर्पण और अथाह प्रेम का सम्मान बन गया।

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मुख्य अतिथि डा० गीता शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा —
“माँ जीवन की पहली गुरु होती है। एक माँ अपने बच्चों के लिए जो त्याग करती है, उसका मूल्य कभी नहीं चुकाया जा सकता। आज की पीढ़ी को चाहिए कि वह अपनी माताओं का सम्मान केवल एक दिन नहीं बल्कि हर दिन करे।”
उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक दौर में परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों को प्रेम और संस्कार ही जोड़ सकते हैं और इसकी शुरुआत माँ के सम्मान से होती है।
एसआरवीएस विद्यालय के असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर श्याम जी ने कहा —
“मदर्स डे सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि उस शक्ति को प्रणाम करने का अवसर है, जो हर कठिन परिस्थिति में परिवार को संभालती है।”

एसआरवीएस प्रधानाचार्य संजीव भूषण सिन्हा ने बच्चों को संस्कारों का संदेश देते हुए कहा —
“अपने माता-पिता का सम्मान करना ही सबसे बड़ा धर्म है। बच्चों को चाहिए कि वे घर के कार्यों में सहयोग करें और अपने व्यवहार से परिवार का नाम रोशन करें।”
विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी सजावट, आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और भावनात्मक संदेशों से पूरी तरह सजा नजर आया। कार्यक्रम के दौरान कई माताएं भावुक दिखीं तो बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी।
अंत में बच्चों ने अपनी माताओं को उपहार और शुभकामना कार्ड भेंट कर प्यार जताया। यह पल इतना भावुक था कि कई माताओं की आंखें नम हो गईं।
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“जहां माँ का सम्मान होता है, वहीं संस्कारों का भविष्य जन्म लेता है… और एसआरवीएस स्कूल सिकंदरपुर ने इस एहसास को उत्सव बनाकर जीवंत कर दिया।”



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